Success Story, IAS Officer: आईएएस बनने के लिए स्टेटस या भाषा नहीं, बल्कि काबिलियत, तेज दिमाग, जुनून और आत्मविश्वास की जरूरत होती है. हिंदी मीडियम के कई स्टूडेंट्स को लगता है कि भाषा उनकी सक्सेस में रुकावट बन सकती है (Hindi Medium Topper In UPSC). लेकिन ऐसा है नहीं. जानिए हिंदी मीडियम से पास आउट कुछ आईएएस अफसरों की सक्सेस स्टोरी.
Hindi Medium Topper: अंग्रेजी एक ग्लोबल भाषा है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य भाषाओं का स्टेटस उससे कम हैं. संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विस परीक्षा भारत ही नहीं, दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है (UPSC Exam). इसमें हिंदी व अंग्रेजी, दोनों मीडियम के उम्मीदवार शामिल होते हैं. हमारे सामने कई ऐसे आईएएस अफसरों की कहानियां हैं, जिन्होंने हिंदी माध्यम से परीक्षा देकर टॉपर्स में जगह बनाई है (IAS Success Story).
Gaurav Budania IAS: आईएएस गौरव बुडानिया ने साल 2020 में यूपीएससी परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल की थी. वह राजस्थान के चूरू जिले के एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं. उन्होंने आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है. इसके बाद सोशियोलॉजी में मास्टर्स किया था. उन्होंने 2018 में आरएएस परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल की थी. एसडीएम की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने हिंदी मीडियम से आईएएस परीक्षा पास कर ली थी. गौरव कहते हैं कि परीक्षा की तैयारी पॉजिटिव माइंड के साथ करनी चाहिए.
Ganga Singh Rajpurohit IAS: राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले गंगा सिंह राजपुरोहित ने 2016 में यूपीएससी परीक्षा में 33वीं रैंक हासिल की थी. बीएससी करने के बाद उन्होंने आईएएस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. उनका वैकल्पिक विषय हिंदी साहित्य था. उन्होंने NCERT किताबों से पढ़ाई की थी. वह बार-बार रिवीजन करने पर जोर देते हैं. वह कहते हैं कि यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव आते हैं. ऐसे में धैर्य बनाकर रखना चाहिए.
Gaurav Singh Sogarwal IAS: गौरव सिंह सोगरवाल राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले हैं. उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ था. जब वह 3 साल के थे तो उनकी मां का और 14 साल की उम्र में पिता का देहांत हो गया था. उन्हें अपने साथ ही अपने भाई-बहनों का पालन-पोषण भी करना था. उन्होंने पुणे की भारती विद्यापीठ से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है. इस दौरान वह ट्यूशन भी पढ़ाते थे. वह पहले और दूसरे प्रयास में असफल हो गए थे, तीसरे में IPS और चौथे में 46वीं रैंक के साथ IAS बन गए थे.
Gaurav Kumar Singhal IAS: आईएएस गौरव कुमार सिंघल उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले हैं. 2016 में यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने 31वीं रैंक हासिल की थी. उन्होंने हिंदी मीडियम से परीक्षा दी थी और अपने छठे प्रयास में सफल हुए थे. वह कहते हैं कि हर अभ्यर्थी की रणनीति अलग होती है (UPSC Exam Strategy). सबको खुद पर विश्वास और धैर्य रखना चाहिए. इस दौरान अपनी मेंटल हेल्थ का भी खास ख्याल रखना जरूरी है.
Anuradha Pal IAS: अनुराधा पाल एक बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता दूध विक्रेता थे. उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूलिंग पूरी करने के बाद उत्तराखंड में ही गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी. अनुराधा पाल ने 2012 में आईएएस परीक्षा में 451वीं रैंक हासिल की थी और 2015 में 62वीं. अनुराधा कहती हैं कि हर अभ्यर्थी को अपनी रुचि के हिसाब से वैकल्पिक विषय का चयन करना चाहिए (UPSC Optional Subjects).

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Hindi Medium Topper: अंग्रेजी एक ग्लोबल भाषा है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य भाषाओं का स्टेटस उससे कम हैं. संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विस परीक्षा भारत ही नहीं, दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है (UPSC Exam). इसमें हिंदी व अंग्रेजी, दोनों मीडियम के उम्मीदवार शामिल होते हैं. हमारे सामने कई ऐसे आईएएस अफसरों की कहानियां हैं, जिन्होंने हिंदी माध्यम से परीक्षा देकर टॉपर्स में जगह बनाई है (IAS Success Story).

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